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नबी-ए-पाक के पैग़ामे अमनो मोहब्बत को घर-घर तक पहुंचाएंgar

गोरखपुर, उत्तर प्रदेश मौलाना अली अहमद बरकाती ने कहा कि नबी-ए-पाक हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने पूरी दुनिया को ईमान के साथ दीन-ए-इस्लाम के मुताबिक


नेक अमल करने की तालीम दी। हम अपनी ज़िन्दगी को नेक कामों से संवारें और बुराइयों से बचें। नबी-ए-पाक और आपके सहाबा की पैरवी हमारी पहली जिम्मेदारी है, इसलिए नबी-ए-पाक की तालीम पर हम सब अमल करें। रहती दुनिया तक खुलफा-ए-राशिदीन हज़रत अबूबक्र, हज़रत उमर, हज़रत उस्मान, हज़रत अली की ख़िदमात को दुनिया भुला नहीं सकती। 

यह बातें बतौर मुख्य वक्ता मौलाना अली अहमद ने बौलिया रेलवे कॉलोनी में इसाले सवाब के जलसे में कही। 

अध्यक्षता करते हुए मौलाना शमसुद्दीन निज़ामी ने कहा कि नबी-ए-पाक ने अपने जीवन में ही अपने सच्चे और अच्छे सहाबा की वह पाक जमात तैयार की जिसके हर व्यक्ति ने नबी-ए-पाक का हर पैग़ाम पूरी दुनिया में पहुंचाया। दुनिया आज जिस दौर से गुजर रही है, इन हालातों में हर कलमा पढ़ने वाले की यह जिम्मेदारी है कि वह नबी-ए-पाक के पैग़ामे अमनो मोहब्बत को घर-घर तक पहुंचाएं। 

संचालन करते हुए हाफ़िज़ अज़ीम अहमद नूरी ने अवाम से कहा कि नमाज़, रोजा, जकात, हज दीन-ए-इस्लाम के स्तंभ हैं इनकी हिफाजत करें। हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करें। इल्म हासिल करने पर जोर दें। बच्चों को दीनी तालीम हर हाल में दिए जाने की व्यवस्था करें। दुनियावी तालीम पर भी ध्यान दें। बेटियों को भी अच्छी तालीम दें। हर हाल में औरतों की इज़्ज़त करें। साफ-सफाई को अपनाएं। जमीन को हरा-भरा करें। पानी की बचत करें। पड़ोसियों का हक, आम इंसानों और मजदूरों का हक अदा करें। यतीमों, बेसहारा, विधवाओं पर रहम करें। गरीबों को खाना खिलाएं, कपड़ा पहनाएं। मरीजों का हालचाल पूछें। सच बोलें, ईमानदार बनें। वतन से मोहब्बत करें। क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत हाफ़िज़ मो. लतीफ ने की। नात शरीफ हाफ़िज़ मो. आरिफ ने पेश की। आखिर में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो सलामती के दुआ मांगी गई।जलसे में रिंकू, वली जान, झीनक, रमज़ान, मो. शोएब, शाबान, अरशद, मो. सलीम आदि मौजूद रहे।


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