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सफेदपोश के संरक्षण में फल फूल रहे है अंचलाधिकारी पटना सदर

 


पटना, बिहा पटना सदर के अंचल अधिकारी जितेंद्र पांडेय अपने आप को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उच्च अधिकारी समझते है। 

पटना में खुले आम पटना सदर अंचल अधिकारी जितेंद्र पांडेय मुख्यमंत्री के आदेशों का खुले आम उड़ा रहे धज्जियां। 

अंचल अधिकारी पटना सदर  जितेंद्र पांडेय अपने पद का कर रहे है दुरुपयोग। पटना सदर अनुमंडल एबं पटना सिटी अनुमंडल अंतर्गत अंचल पड़ने पर  अंचलाधिकारी दोनो अनुमंडलों का उठाते है फायदा। 

दाखिल खारिज का ज्यादा प्रेसर पड़ने पर अंचलाधिकारी स्तर से सभी को रद्द कर दिया जाता है जबकि कर्मचारी रिपोर्ट और CI रिपोर्ट सही रहता है। कार्य मे पेंडिंग कम हो इसके लिए लगातार अंचलाधिकारी स्तर से रेजेक्टेड कर दिया जाता है। अंचलाधिकारी पटना सदर कर्मचारी पर करवाई करने के बजाय इनके द्वारा कोई भी करवाई नहीं किया गया है इस लिए  कार्य को कर्मचारी के द्वारा लंबित रखा जाता है।  आज के दिन में उन्हीं के चलते वर्तमान के कर्मचारी पर कार्य लंबित है और वर्तमान कर्मचारी को बदनाम करने की साजिश की जा रही है। 

पटना सदर के अंचल अधिकारी जितेंद्र पांडेय अपने आप को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उच्च अधिकारी समझते है। 

कर्मचारी के ऊपर  कार्रवाई करने के बजाय कर रहे हैं उनका समर्थन। ऐसा प्रत्रित होता कर्मचारी अंचलाधिकारी करीब 

 सहयोगी है। आखिर सबसे मामला बड़ा यह उठता है कि जब से अंचल अधिकारी पटना सदर जितेंद्र पांडे ने पटना सदर का कार्यभार संभाला है तब से अब तक ऑफिस आना तो दूर की बात जनता के बीच आने से  कटराते हैं आखिर मामला क्या है ? इसका जवाब तो आला अधिकारी ही  दे सकते हैं। या ऐसा भी प्रतीत हो सकता है कि अंचल अधिकारी पटना सदर जितेंद्र पांडे प्रधान सचिव के करीबी माने जाते हैं इसलिए ऑफिस नहीं आने के बावजूद भी उन पर अब तक करवाई नहीं किया जा रहा है अंचल अधिकारी पटना सदर जितेंद्र पांडे के द्वारा अगर कार्यालय में बैठा जाता तो जनता की बातों को सुनकर उनके समस्याओं को दूर किया जा सकता था। 

आखिर अधिकारी क्यों नहीं मानते हैं मंत्री एवं मुख्यमंत्री के बातों को जनता के साथ हो रही है परेशानी जनता को दिए गए समय सीमा के अंदर नहीं हो रहा है कोई भी कार्य इसके लिए कौन है जिम्मेदार। इन दिनों बिहार सरकार के द्वारा चलाए जा रहे हैं कोई भी योजनाएं का नहीं हो रहा है सही ढंग से उपयोग और नहीं हो पा रहा समय सीमा अंतराल के अंतर्गत कोई भी कार्य आखिर इसका जिम्मेदार कौन जिला अंतर्गत जिला प्रशासन या फिर राज्य अंतर्गत उस विभाग के सचिव जिस विभाग का कार्य हो? बिहार सरकार के अंतर्गत बनाया गया समय सीमा में मनमानी क्यों सूबे के सरकार के द्वारा कहा गया था कि कोई भी आवेदन जैसे दाखिल खारिज एलपीसी जमाबंदी समय सीमा के अंतराल में ही मिलेगा लेकिन आए दिन देखा जाता है कि कोई भी उपरोक्त लिखे प्रमाण पत्र समय सीमा के पहुंच से बाहर दिखाई देता है क्या इन सब मामलों का खबर अधिकारी को रहता है या नहीं?  इस मामले को लेकर अंचलाधिकारी पटना सदर कार्यालय से रहते हैं नदारद यह फिर कार्यपालक सहायक से लेकर क्लर्क तक ही छोड़ दिया जाता है कार्यालय का सारा कार्य। सूत्रों की माने तो ऐसा नहीं है समय सीमा के अंतराल में कार्य नहीं होने की जानकारी सभी पदाधिकारी को होता है लेकिन आज तक किसी भी पदाधिकारी को सरकार की ओर से या फिर आला अधिकारी की ओर से कोई भी संबंधित  पढ़ाधिकारी पर कार्रवाई की गई क्या? आर्थिक दंड दिया गया क्या मासिक वेतन से दर्द के रूप में वेतन कटौती की गई क्या? जबकि सरकार की ओर से सभी जगह सभी कार्य के अनुसार निगरानी के रूप में टीम गठित की गई है लेकिन जिला प्रशासन इस पर नजर अंदाज कर क्यों बैठे रहते हैं अंचल अधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी,उपसहर्ता भूमि सुधार  अपरसंमहर्ता, जिलाधिकारी अधिकारी पटना  को इन सब की जानकारी होती है लेकिन आज तक करवाई शून्य। मुख्यमंत्री कौन होते हैं देखने वाले अपने विभाग के मालिक हम खुद हम अपनी मर्जी से काम करेंगे सरकार के द्वारा तय सीमा को हम क्यों माने जनता जहां जाना चाहती है जाए मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है यह लगभग सभी विभागों का है मामला।   सरकार को बदनाम करने की की जा रही है साजिश मुख्यमंत्री स्तर से इसकी निगरानी होनी चाहिए और संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ जो समय सीमा के तहत कार्य नहीं करते उन पर विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सके ताकि कार्य संस्कृति में बदलाव हो लेकिन ऐसा नहीं होता कार्य नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों का तबादला का शिकार बनाया जाता है या फिर बैसे मजबूर कॉन्ट्रैक्ट  कर्मचारी कार्यपालक सहायक को निशाना बनाया जाता है आखिर ऐसा कब तक चलता रहेगा सरकार के द्वारा बनाया गया है। क्या सरकार के द्वारा क्या सरकार के द्वारा आला अधिकारियों पर निशाना बनाया गया है क्या?

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